चंद्रशेखर का जीवन परिचय

युवा तुर्क के नाम से मशहूर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर देश के 9वें प्रधानमंत्री थे। चंद्रशेखर ऐसे प्रधानमंत्री थे जो राज्यमंत्री या केंन्द्र मंत्री बने बिना ही सीधे देश के प्रधानमंत्री बने। चंद्रशेखर एक प्रखर वक्ता, लोकप्रिय राजनेता, विद्वान लेखक और समीक्षक थे। वे अपने तीखे तेवरों और खुलकर बात करने के लिये जाने जाते थे।

चंद्रशेखर का जीवन परिचय

चंद्रशेखर का जन्म 1 जुलाई 1927 में बलिया,उत्तर प्रदेश के ग्राम इब्राहीमपट्टी में एक किसान परिवार में हुआ। चंद्रशेखर की प्रारम्भिक शिक्षा भीमपुरा के रामकरन इण्टर कॉलेज में हुई। इसके बाद उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान से पोस्टग्रेजुएट की डिग्री हासिल की। चंद्रशेखर छात्र राजनीति में सक्रिय थे उन्हे “फायरब्रान्ड” के नाम से जाना जाता था। छात्र राजनीति के बाद वे मुख्यधारा की राजनीति में आये और समाजवादी विचारधारा के नेता बनें। इनका विवाह दूजा देवी के साथ सम्पन्न हुआ।

चंद्रशेखर को आचार्य नरेंद्र देव के साथ जुडने का मौका मिला। चंद्रशेखर बलिया जिले से प्रजा समाजवादी पार्टी के सचिव बनें। उन्होने कम समय में एक बडी पहचान बनाईं। एक साल के भीतर ही वे प्रदेश के संयुक्त सचिव बनें। बाद में 1955—56 में प्रदेश महासचिव बने।

चंद्रशेखर जमीन से जुडे नेता थे और लगातार जनता के बीच लो​कप्रिय होते जा रहे थे। सन 1962 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा से सांसद चुने गये। जनवरी 1965 में उन्होने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और कांग्रेस के लिये जमीनी स्तर पर काम किया। जिसके कारण उन्हें 1967 में कांग्रेस की संसदीय दल का महासचिव चुना गया। चंद्रशेखर ने दलितों, पिछडो के लिये कार्य करना शुरू किया और उच्च वर्गों के गलत तरीके से बढ रहे एकाधिकार के खिलाफ आवाज उठाई। इससे देश की जनता तो उनके साथ हो गई लेकिन सत्ता पर आसीन लोगों से उनका टकराव शुरू हो गया।

चंद्रशेखर आवाज अहम मुद्दों पर खूब आवाज उठाते थे। चंद्रशेखर के व्यक्तित्व बेबाक बोलने वाले प्रभावशाली नेता के रूप में था। लोग इनके सामने आवाज नही उठा पाते थे। कांग्रेस मे होते हुये भी वे कई मुद्दों पर कांग्रेस के खिलाफ खडे हो जाया करते थे। कई बार उन्होने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भी आलोचना की। यही कारण था कि आपातकाल के दौरान कांग्रेसी नेता होने के बाबजूद भी चंद्रशेखर को जेल में डाल दिया गया।

सन 1977 में जनता दल की टिकट से उत्तर प्रदेश के बलिया लोकसभा से चंद्रशेखर सांसद बने। इस बार देश में जनता पार्टी की सरकार बनी और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बनें। चंद्रशेखर को मंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन चंद्रशेखर ने मंत्री बनने से इंकार कर दिया। वे जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गये।

6 जनवरी सन 1983 में चंद्रशेखर ने दक्षिण के कन्याकुमारी से दिल्ली के राजघाट तक एक पदयात्रा की। 4260 किमी लम्बी ये पदयात्रा 25 जून 1983 को समाप्त की गई। इस पदयात्रा से इंदिरा गांधी भी घबरा गई। इन पदयात्रा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझना और असमानाओं को दूर करना था।

1990 में जव वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे तब उन्होने लाल कृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया। लाल कृष्ण आडवाणी उस वक्त भाजपा के बडे नेताओं मे जाने जाते थे जिसके कारण भाजपा ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया जिससे वीपी सिंह को ​इस्तीफा देना पडा। वीपी सिंह के इस्तीफे के बाद राजीव गांधी के सम​र्थन से 10 नवम्बर 1990 में चंद्रशेखर ने इस देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद चंद्रशेखर ने कांग्रेस के हिसाब से चलने से इंकार कर दिया गया। उस समय राजीव गांधी के घर के बाहर दो संदिग्ध व्यक्ति पाये गये। वे हरियाणा पुलिस के सिपाही थे। खबरें आईं कि चंद्रशेखर उन सिपाहियों से राजीव गांधी की जासूसी करवा रहे हैं। जिससे क्षुब्ध होकर राजीव गांधी ने समर्थन वापस ले लिया और 6 मार्च 1991 में चंद्रशेखर की सरकार गिर गई और उन्होने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन वे अगले प्रधानमंत्री चुने जाने तक इस पद पर बने रहे।

चंद्रशेखर के समय में मुद्रा कोष का प्रेशर और भुगतान का संकट आया। इस समय देश को 55 टन सोना​ गिरवीं रखना पडा। उस समय चंद्रशेखर के आर्थिक सलाहकार डा. मनमोहन सिंह थे। सत्ता जाने के बाद भी चंद्रशेखर कई बार लोकसभा से सांसद रहे। कहा जाता है कि चंद्रशेखर राम जन्मभूमि मुद्दे पर दोनो पक्ष को समाधान के लिये मना चुके थे लेकिन जब तक वे कोई समाधान करा पाते तब तक ​मस्जिद टूट गई।

चंद्रशेखर एक साफ एवं स्वच्छ छवि के नेता थे। उनके सामने कोई भी नेता बोलने की हिम्मत नही करता था। चन्द्रशेखर उनके संसदीय वार्तालाप के लिए बहुत चर्चित थे। उन्हें 1995 में आउटस्टैण्डिंग पार्लिमेन्टेरियन अवार्ड भी मिला था। यह अवार्ड उसी साल शुरू हुआ था और चंद्र शेखर इस अवार्ड को पाने वाले पहले सांसद ​थे।

चंद्रशेखर का निधन

अपने आखिरी दिनों में चंद्रशेखर प्लाज्मा कैंसर से पीडित थे। तबियत ज्यादा बिगडने पर उन्हें 3 मई 2007 को उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज चला। 80 वर्ष की आयु में 8 जुलाई 2007 को चंद्रशेखर ने अंतिम सांस ली।