चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय

चौधरी चरण ​सिंह भारत के पांचवे प्रधानमंत्री ​थे। मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद चौधरी चरण सिंह इस देश के प्रधानमंत्री बनें। हांलांकि वे केवल 5 महीनों के लिये ही प्रधानमंत्री पद पर रह सके लेकिन इस दौरान उन्होंने किसानों की स्थति सुधारने व उनके अधिकार के लिए कार्य किया। चौधरी चरण सिंह ने इस देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

चौधरी चरण सिंह का जीवन परिचय

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर 1902 में मेंरठ, उत्तर प्रदेश जिले के नूरपुर में के एक जाट ​परिवार में हुआ था। उनके पिता मीर सिंह चौधरी एक किसान थे। इनके परिवार का संबंध 1857 की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले राजा नाहर सिंह से था. इनके पिता की अध्ययन में काफी रूचि थी इनके पिता गरीब थे लेकिन अपने नैतिक मूल्यों के कारण समाज में जाने जाते थे। चौधरी चरण सिंह के जन्म के बाद उनके पिता मीर सिंह सपरिवार भूपगढी में आकर बस गये।

चौधरी चरण सिंह की प्राथमिक शिक्षा नूरपुर में ही हुई। उसके बाद उन्होने मेरठ के सरकारी हाई स्कूल में दाखिला ले लिया। 1923 में चरण सिंह ने विज्ञान विषय ग्रेजुएशन ओर 1925 में कला वर्ग से पोस्ट ग्रेजुएशन की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होने आगरा विश्वविद्यालय से लॉ की पढाई पूरी की और सन 1928 में गाजियाबाद में वकालत करना शुरू कर दिया। चौधरी चरण सिंह केवल उन्ही लोगों के मुकदमें लडते थे जिनमें उनके मुवक्किल का पक्ष उन्हे न्यायपूर्ण लगता था।

चौधरी चरण सिंह देश सेवा करना चाहते थे इसलिये पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर चरण सिंह ने 1929 में कांग्रेस कमेटी का गठन किया। 1930 में महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत नमक कानून तोडने में गांधी के साथ थे। गाजियाबाद की सीमा से बहने वाली हिण्डन नदी पर उन्होने नमक बनाया जिसके कारण उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया और 6 महीने की सजा हुई। जेल से लोटने के बाद चौधरी चरण सिंह ने स्वयं को पूरी तरह से स्वतंत्रता आंदोलन में समर्पित कर दिया। इसके बाद वे सत्याग्रह आंदोलन में 1940 में गिरफ्तार हुये और उन्हे 1941 में छोडा गया। जिस समय वे जेल से बाहर देश में में पूरी तरह से अंसतोष व्याप्त था। चारों तरफ अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह हो रहा था। अंग्रेजो भारत छोडो के नारे पूरे देश में गूंज रहे थे। 9 अगस्त 1942 में चरण सिंह ने भूमिगत रहकर गाजियाबाद हापुड, मेरठ, मवाना, सरथना, बुलंदशहर आदि गांव के युवाओं को जोडकर एक गुप्त क्रान्तिकारी संगठन बनाया। चरण सिंह मेरठ कमिश्नरी के लिये एक चुनौती बन चुके थे। मेरठ प्रशासन ने चौधरी चरण सिंह को देखते ही गोली मारने के आदेश दे रखे थे। लेकिन चरण सिंह पुलिस से लुका छिपी का खेल खेलते रहे। जब तक पुलिस को पता चलता तब तक चरण सिंह सभा को सम्बोधित करके निकल जाते थे। काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने चरण को गिरफ्तार कर लिया और डेढ साल के लिये जेल भेज दिया।

प्रधानमंत्री बनने का सफर

आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू का देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। चरण सिंह के विचार जवाहर लाल नेहरू के विचारों से अलग थे। वे जवाहर लाल नेहरू की आर्थिक नीति के आलोचक थे। जिसके कारण दोनों मे राजनीतिक टकरावा था। सन 1967 में चरण सिंह ने कांग्रेस पार्टी का छोड कर राज नारायण एवं राम मनोहर लोहिया के साथ मिलकर नई पार्टी का गठन किया। जिसका नाम जनता दल रखा गया। इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल ​के दौरान कांग्रेस विरोधी लहर थी जिसमें जनता दल ने अपनी सरकार बनाई और मोरारजी देसाई को देश का प्रधानमंत्री चुना गया। मोरारजी देसाई ने कार्यकाल में चौधरी चरण​ सिंह को उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बनाया गया। लेकिन इस दौरान चौधरी चरण सिंह और मोरारजी देसाई में मतभेद बढ गये और चौधरी चरण सिंह ने जनता दल को छोड दिया जिससे मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई। इसके बाद चौधरी चरण सिंह को इंदिरा गांधी का समर्थन प्राप्त हुआ। चौधरी चरण सिंह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई और 28 जुलाई 1979 को देश के प्रधानमंत्री बनें। इंदिरा गांधी ने समर्थन के साथ एक शर्त रखी थी कि कांग्रेस पार्टी और इंदिरा गांधी के खिलाफ दर्ज किये गये मुकदमें वापस लिये जाऐं लेकिन चरण सिंह ने इस शर्त को नही माना। जिसके बाद इंदिरा ने 19 अगस्त 1979 कसे समर्थन वापस ​ले लिया। जिसके बाद चौधरी चरण सिंह ने 14 जनवरी 1980 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 29 मई 1987 को चौधरी चरण सिंह की मृत्यु हो गई।

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