गुलजारी लाल नंदा का जीवन परिचय

एक महान राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद व अर्थशास्त्री गुलजारी लाल नंदा भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। गुलजारी लाल नंदा बेहद कम समय के देश के प्रधानमंत्री बनें। दो बार प्रधानमंत्री बनने वाले नंदा जी ने प्रधानमंत्री पद पर कुल 27 दिन तक कमान संभाली। पहली बार प्रधानमंत्री वे तब बने जब पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु हो गई। 27 मई 1964 से 9 जून 1964 तक वे इस पद पर बिराजमान रहे। दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मृत्यु के बाद 11 जनवरी 1966 से 26 जनवरी 1966 तक इस पद पर रहे।

गुलजारी लाल नंदा का जीवन परिचय

गुलजारी लाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 में सियालकोट (पश्चिमी पाकिस्तान) में। गुलजारी लाल नंदा के पिता का नाम बुलाकी राम नंदा और माता का नाम श्रीमती ईश्वर देवी नंदा था। नंदा जी की प्रारम्भिक शिक्षा सियालकोट मे ही हुई। इसके बाद लाहौर से लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। गुलजारी लाल नंदा ने कला संकाय से स्नातकोत्तर और कानून से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। 18 वर्ष की आयु में ही नंदा का विवाह लक्ष्मी देवी के साथ हो गया।

आजादी से पहले गुलजारीलाल नंदा बस सेवा के मालिक के रूप में प्रसिध्द थे। नंदा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में श्रम समस्याओं पर एक अनुसंधान विद्वान के रूप में काम किया और 1921 में बॉम्बे नेशनल कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बनें।

गुलजारी लाल नंदा गांधी से काफी प्रेरित थे। वे एक राष्ट्रभक्त थे। गुलजारी लाल नंदा का स्वीधनता संग्राम में काफी योगदान रहा। सन 1921 में वे असहयोग आंदोलन में बढचढ कर हिस्सा लेने वाले नेताओं मे से एक थे। सन 1922 से 1946 तक गुलजारी लाल नंदा अहमदाबाद की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में लेवर एसोशिएशन के सचिव रहे। 1932 में सत्याग्रह आंदोलन के दौरान गुलजारी लाल नंदा को गिरफ्तार किया गया उसके बाद गुलजारी लाल नंदा को 1942—1945 के भारत छोडो आंदोलन के दौरान भी जेल जाना पडा।

नंदा मुम्बई विधान सभा से 1937 से 1939 तक विधायक रहे। स्वतंत्रा के बाद भी 1947 से 1950 तक वे मुम्बई विधान सभा से विधायक रहे। वे मुम्बई सरकार में श्रम एवं आवास मंत्रालय देखते थे। आजादी के बाद इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना गुलजारी लाल नंदा के नेतृत्व में हुई। 1950-1951, 1952-1953 और 1960-1963 में भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद पर रहे। ऐसे में भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में इनका काफ़ी सहयोग पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्राप्त हुआ।

गुलजारी लाल नंदा भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और कई मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। सितम्बर 1951 से मई 1952 तक योजना मंत्रालय का कार्यभार संभाला फिर मई 1952 से जून 1955 तक योजना आयोग और नदी घाटी की परियोजना का कार्य देखा। गुलजारी लाल नंदा ने योजना, सिचाई एवं ऊर्जा, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का काम भी सफलतापूर्वक देखा।

प्रधानमंत्री बनने का सफर

गुलजारी लाल नंदा कांग्रेस नेतृत्व के भरोसेमंद व कद्दावर नेता थे। भारत सरकार में कई मंत्रालयों का कार्यभार सफलतापूर्वक देखने वाले नंदा देश में भी एक प्रतिष्ठित नेता माने जाते थे। 27 मई 1964 का देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने गुलजार लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त किया। दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में अचानक मृत्यु के बाद उन्हे देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। इनका कार्यकाल दोनों बार उसी समय तक सीमित रहा जब तक की कांग्रेस पार्टी ने अपने नए नेता का चयन नहीं कर लिया।

नंदा जी राजनीति से इतर एक लेखक भी थे। उन्होने कई पुस्तकों की रचना की। ​जिनमें साम आस्पेक्ट्स आफ खादी, अप्रोच टू द सेकंड फाइव इयर प्लान, गुरू तेगबहादुर, संत एंड सेवियर, हिस्ट्री आफ एडजस्टमेंट इन द अहमदाबाद टेक्स्टाइल्स प्रमुख थीं।

गुलाजारी लाल नंदा देश के एक प्रतिभाशाली नेता थे। वे मजूदरों के नेता के रूप में जाने जाते थे। गुलजारी लाल नंदा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (1997) और दूसरे सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। नंदा दीर्घायु हुए और 100 वर्ष की अवस्था में इनका निधन 15 जनवरी 1998 को हुआ। इन्हें एक स्वच्छ छवि वाले गांधीवादी राजनेता के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।