पण्डित जवाहर लाल नेहरू का जीवन परिचय | Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi

पण्डित जवाहर लाल नेहरू का चाचा नेहरू के नाम से भी जाना जाता है। पण्डित जवाहर लाल नेहरू स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री भी थे। पण्डित जवाहर लाल नेहरू एक महान व्यक्ति होने के साथ साथ एक ऐसा नेता भी थे जिनके नेतृत्व में देश को आजादी मिली।

पण्डित जवाहर लाल नेहरू का जीवन परिचय | Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi

पण्डित जवाहर लाल नेहरू का जन्म सन 1889 में इलाहाबाद में हुआ था। जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू एक बेरिस्टर थे जो कि कश्मीरी पण्डित समुदाय से आते थे। जवाहर लाल नेहरू की मॉ का नाम स्वरूपरानी थुस्सू था।

जवाहर लाल नेहरू की प्रारम्भिक शिक्षा का प्रबन्ध उनके घर पर ही हुआ। उन्हे पढाने घर पर ही शिक्षक आता था। 15 वर्ष की आयु के बाद नेहरू को पढाई के लिये इंग्लैंड भेज दिया गया। जहॉ उन्होने हैरो स्कूल और कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में पढाई की। नेचुरूल साइंस मे आनर्स की डिग्री के बाद नेहरू जी ने लंदन से ही इनर टेम्पल कॉलेज से लॉ की पढाई की। सन 1912 में भारत लौटने के बाद उन्होने अपने पिताजी मोतीलाल नेहरू के साथ ही वकालत शुरू कर दी। सन 1916 में नेहरू जी की शादी कमला नेहरू जी से हो गई। वकालत के समय ही नेहरू जी गॉधी से बहुत प्रभावित हुये और भारत की आजादी के लिये प्रयास करने लगे।

सन 1919 में नेहरू जी महात्मा गांधी के सम्पर्क में आये। उस समय गांधी जी रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक आंदोलर कर रहे थे। पण्डित नेहरू गॉधी जी के अवज्ञा आंदोलन से काफी आ​कर्षित हुये।

रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति खासे आकर्षित हुए। नेहरू और उनके परिवारीजन गांधी जी से इतने प्रेरित हुये कि जवाहर लाल नेहरू अपने पिता समेत देश की आजादी के लिये आंदोलन मे शामिल हो गये। पण्डित नेहरू ने ​पश्चिमी कपडों और महंगी सम्पतियों को छोड दिया और खादी कुर्ता व गांधी टोपी लगाकर कर गांधी जी के साथ सक्रिया हो गये। जवाहर लाल नेहरू ने 1920—22 के असहयोग आंदोलन में बढचढ कर हिस्सा लिया और इस दौरान वे पहली बार गिरफ्तार हुये। कई महीनें जेल में बिताने के बाद उन्हे रिहा कर दिया गया।

पण्डित जवाहर लाल नेहरू अब देश के एक जाने पहचाने नेता के रूप में अपनी छवि बना रहे थे। वर्ष 1924 में उन्हे इलाहाबाद नगर निगम का अध्यक्ष चुना गया। नेहरू जी ने 2 वर्ष तक शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम करने के बाद 1926 में इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का कारण उन्होने बिट्रिश अधिकारियों द्वारा काम में सहयोग न करना बताया।

वर्ष 1926 में जवाहर लाल नेहरू को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का महासचिव बनाया गया। वहीं सन 1929 में नेहरू को कांग्रेस पार्टी का मुखिया चुना गया। नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की मांग की और 26 जनवरी 1930 को लाहौर में स्वतंत्र भारत का झण्डा तिरंगा फहराया।

​बिट्रिश सरकार ने भारत अधिनियम 1935 प्रख्यापित किया तब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव लडने के लिये राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया। हांलांकि नेहरू चुनाव से बाहर रहे ​लेकिन कांगेस ने हर राज्य में सरकारों का गठन किया और केंन्द्रीय असेंम्बली में सबसे ज्यादा सीटें भी हासिल की।

सन 1942 में नेहरू जी के नेतृत्व में अंग्रेजो भारत छोडा का नारा उठाया गया जिसकी वजह से बिट्रिश सरकार ने नेहरू का जेल में डाल दिया। लेकिन बिट्रिश सरकार की अन्तर्राष्ट्रिय हालत खराब हो चुकी है जिसके कारण वो कमजोर होने लगे।

15 अगस्त 1947 में भारत को आजाद कर दिया गया। पण्डित जवाहर लाल नेहरू को स्वतंत्र भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद जवाहर लाल नेहरू ने देश की बागडोर ऐसी स्थिति मे हाथ में ली थी जब बिट्रिश शासन ने पूरी अर्थव्यस्था को तहस नहस कर दिया था। वहीं देश के दो टुकडे हो चुके थे। ऐसे में पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने बडी सूझ—बूझ से इस देश को पटरी पर लाने का काम किया। 27 मई 1964 दिल का दौरा पडने से नेहरू जी की मृत्यु हो गई।

नेहरू की जंयती को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है

पण्डित नेहरू बच्चों को बहुत प्रेम करते थे। नेहरू जी ने बच्चों के आहार और जरूरतों के हिसाब ने नयी—नयी योजनाओं का शुरू किया।

जवाहरलाल नेहरु जी बच्चों से बहुत प्रेम करते थे और बच्चे भी उनसे इसीलिए बच्चे उन्हें चाचा नेहरु के नाम से पुकारा करते थे और आज भी उन्हें इस नाम से सभी लोग जानते हैं। नेहरु जी बच्चों के कल्याण हेतु बहुत सोचते थे और उनके लिए सही आहार और जरूरतों का ख्याल रखने के समय-समय पर नयी योजनाओं की शुरू करते थे।

नेहरू जी का मानना था कि बच्चे देश का भविष्य हैं इसलिये उनको जरूरी आहार और अच्छी शिक्षा मिल सके। नेहरू बच्चों में काफी लोकप्रिय थे। बच्चे उन्हे चाचा नेहरू के नाम से जानते थे। आज भी उन्हे बच्चों मे इसी नाम से जाना जाता है। भारत में नेहरू जी को याद करते हुये उनकी जयंती को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

जवाहर लाल नेहरू की जेल यात्राऐं

पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने आजादी की लडाई लडते हुये कई बार जेल काटी। पहली बार 1920 से 1920 के बीच में चले असहयोग आंदोलन के बाद जेल भेजा गया। सन 1930—35 तक वे नमक सत्याग्रह आंदोलन और कांग्रेस द्वारा चलाये गये कई आंदोलनों के कारण जेल गये। वहीं 1942 में भारत छोडो आंदोलन के बाद उन्हे जेल में डाल दिया गया। जहॉ उन्हे 1030 दिनों तक जेल मे रखा गया। 30 मार्च 1945 को जवाहर लाल नेहरू को फिर गिरफ्तार किया गया और उन्हे बरेली सेंट्रल जेल मे भेज दिया गया। 10 जून 1945 को उन्हे रिहा कर दिया गया।

जवाहर लाल नेहरू : एक लेखक के रूप में

जहां पण्डित जवाहर लाल नेहरू एक प्रसिध्द राजनेता थे वहीं एक अच्छे लेखक भी थे। नेहरू जी की कई पुस्तकें प्रकाशित हुई। जिसमें डिस्कवरी आफ इण्डिया काफी पोपूलर रही।

नेहरू जी की पुस्तकें
1.पिता के पत्र : पुत्री के नाम – 1929
2.विश्व इतिहास की झलक (ग्लिंप्सेज ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री) – (दो खंडों में) 1933
3.मेरी कहानी (ऐन ऑटो बायोग्राफी) – 1936
4.भारत की खोज/हिन्दुस्तान की कहानी (दि डिस्कवरी ऑफ इंडिया) – 1945
5.राजनीति से दूर
6.इतिहास के महापुरुष
7.राष्ट्रपिता
8.जवाहरलाल नेहरू वाङ्मय (11 खंडों में)