मोरारजी देसाई का जीवन परिचय

मोरारजी देसाई देश के चौथे प्रधानमंत्री थी। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो कांग्रेस पार्टी से नही ​थे। आपातकाल के बाद कांग्रेस का हराकर सत्ता में आऐ जनता दल ने उन्हे प्रधानमंत्री बनाया। सूची के हिसाब से माना जाऐ तो यह देश के छटे प्रधानमंत्री थे क्योंकि इनसे गुलजारी लाल नंदा ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान अपने हाथों में ली थी। मोरारजी देसाई को भारत के सर्वोच्च नाग​रिक सम्मान भारत रत्न और पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान—ए—पाकिस्तान से नवाजा गया था।

मोरारजी देसाई का जीवन परिचय

मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के भदौली, नामक जगह पर हुआ था। उनके पिता का नाम रणछोडजी देसाई भावनगर था। इनका सम्बंध ब्राह्मण परिवार से था। इनके पिताजी एक स्कूल अध्यापक थे। मोरारजी देसाई जी ने अपनी शिक्षा मुम्बई के एलफिंस्टन कॉलेज से प्राप्त की। वे मुम्बई के गोकुलदास तेजपाल नाम से प्रसिध्द निशुल्क आवास गृह मे रहते थे। मोरारजी देसाई कॉलेज के समय से ही महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक और अन्य कांग्रेसी नेताओं से प्रेरित थे।

स्नातक तक की पढाई पूरी करने के बाद उन्होने मुम्बई प्रोविंशल सिविल सर्विस हेतु आवेदन किया। जहां से वे 1918 में डिप्टी कलेक्टर बने। करीब 11 वर्षों तक वे डिप्टी कलेक्टर के रूप में काम करते रहे और 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल होने के लिये नौकरी छोड दी। यहीं से वे राजनीति मे सक्रिया हो गये जिसके कारण उन्हें कई बार जेल जाना पडा।

मोरारजी देसाई देश के एक सच्चे सिपाही के रूप मे पहचान बना चुके थे। 1931 में उन्हें गुजरात की प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सचिव बनाया गया। जिसके बाद उन्होने अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की शाखा स्थापित और उसके अध्यक्ष बनें। मोरारजी देसाई 1937 से गुजरात कांग्रेस के सचिव रहे। इसकेक बाद बंबई राज्य के कांग्रेस मंत्रिमण्डल में शामिल हुये और राजस्व कृषि वन व सहकारिता मंत्री बनें। आजादी के बाद 1952 में मोरारजी देसाई को बंबई का मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय गुजरात और महाराष्ट बंबई प्रोविंस के नाम से जाने जाते थे। 1967 में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बने तो वे नाराज हो गये। उनका मानना था कि वे पार्टी में सबसे ज्यादा वरिष्ठ हैं और प्रधानमंत्री पद के सही दावेदार भी। इंदिरा गांधी ने मोरारजी देसाई को मनाने के लिये उन्हे उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भी बनाया।

जिस समय इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाये जाने की बात चल रही थी तब मोरारजी देसाई भी प्रधानमंत्री की दौड में थे। कांग्रेस में प्रधानमंत्री पद के लिये वोटिंग कराई गई तो इंदिरा गांधी ने भारी मतो से विजयी प्राप्त की। लेकिन मोरारजी देसाई का सम्मान रखने के लिये उन्हे उपप्रधानमंत्री बनाया गया।

नवम्बर 1969 में कांग्रेस का विभाजन हो गया। कांग्रेस दो खेमों कांग्रेस आई और कांग्रेस ओ में बंट गई थी। मोरारजी देसाई इंदिरा गांधी के खेमें कांग्रेस आई में न जाकर कांग्रेस ओ में चले गये। बाद में सन 1975 में वे जनता दल में शामिल हो गये। आपात काल के दौरान देश में इंदिरा गांधी के खिलाफ माहौल था। लोग इंदिरा गांधी की नसबंदी योजना और आपातकाल से नाराज जनता ने मार्च 1975 के लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी पर भरोसा दिखाया। जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ और 23 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई 81 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनें।

लेकिन इस पार्टी में भी प्रधानमंत्री पद के दो दावेदार हुआ करते थे जिनके नाम थे चौधरी चरण सिंह और जगजीवन रामजय प्रकाश नारायण के समर्थन के कारण मोराजी देसाई प्रधानमंत्री तो बनें लेकिन बहुत ज्यादा समय तक इस पद पर नही रह पाये। चौधरी चरण सिंह ने जनता पार्टी से समर्थन वापस ले लिया और मोरारजी देसाई को 28 जुलाई 1979 को इस पद से इस्तीफा देना पडा। इस्तीफे ​के बाद मोरारजी देसाई ने राजनीति से भी सन्यास ले लिया और मुम्बई में रहने लगे, जहां 10 अप्रेल 1995 को उनका निधन हो गया।