राजीव गांधी का जीवन परिचय

सूचना प्रोद्योगिकी की नींव रखने वाले राजीव गांधी 40 वर्ष की आयु मे देश के 7 वें प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी देश के पहले युवा प्रधानमंत्री थे। राजीव गांधी भारत के सबसे लोकप्रिय राजनीतिज्ञों में से एक माने जाते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद 1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें।

राजीव गांधी का जीवन परिचय

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुम्बई में हुआ। राजीव गांधी के पिता का नाम फीरोज गांधी और मॉ का नाम इंदिरा गांधी था। राजीव गांधी का परिवार देश के बडे परिवारों मे जाना जाता है। इनके नाना जवाहर लाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंत्री ​थे।

राजीव गांधी की प्राथमिक शिक्षा देहरादून में हुई जहां वे महानायक ​अमिताभ बच्चन के साथ पढते थे। आगे की पढाई करनें राजीव गांधी ने लंदन के इम्पीरियल कॉलेज मे दाखिला लिया इसके बाद इंजीनियरिंग की पढाई करने के लिये कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गये। लेकिन उन्होने अपनी इंजीनियरिंग की पढाई पूरी नही की और 1966 में भारत वापस लौट आये। इसके बाद दिल्ली में फ्लाइंग क्लब से पायलट की ट्रैनिंग ली और 1970 में इंडियन एयरलाइन में पायलट के तौर पर काम करने लगे। उस समय उनकी मां इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बन चुकी थीं और उनके भाई संजय गांधी राजनीति में उतर चुके थे।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढाई के दौरान राजीव गांधी की मुलाकात एंटोनिया मैनो से हुई और वे उनसे प्यार करने लगे। सन 1969 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद एंटोनिया मैनो का नाम बदल कर सोनिया गांधी हो गया। राजीव गांधी के दो बच्चे हुये जिनके नाम राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हैं।

राजीव गांधी का राजीनतिक सफर

राजीव गांधी की राजनीति में बिल्कुल भी रूचि नही थी। उनके सहपाठियों के अनुसार उनके पास दर्शन, राजनीति या इतिहास से सम्बन्धित पुस्तकें न होकर इंजीनियरिंग की किताबें हुआ करती थी। राजीव गांधी को संगीत व फोटोग्राफी में रूचि थी। लेकिन 23 जून 1980 में छोटे भाई संजय गांधी की मृत्यु के बाद उन्हे राजनीति में आना पडा और अपनी मॉ इंदिरा गांधी के साथ राजनीति शुरू की। राजीव गांधी ने अमेठी से चुनाव लडा और सांसद बनें। सन 1981 में राजीव गांधी को भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया।

31 अक्टूबर 1984 में राजीव गांधी की मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सैनिक ने गोली मार कर हत्या कर दी। जिसके कुछ घण्टो बाद ही कांग्रेस के सदस्यों ने मिलकर राजीव गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष और देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री बना दिया गया। इससे ज्यादा दुखद एक बेटे के लिये क्या होगा कि उसकी मां की हत्या हो जाऐ। लेकिन इतने दुखी होने के बाद भी उन्होने संतुलन, मर्यादा और संयम के साथ देश की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली और अच्छे से निर्वहन किया।

अगले आम चुनावों में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और फिर देश के 7 वें प्रधानमंत्री बनें। इससे पूर्व वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे। इस चुनाव में कांग्रेस को 80% सीट मिली थीं। प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव गांधी ने देश की उन्नति में अमिट योगदान दिया। राजीव गांधी के द्वारा ही इस देश में संचार क्रान्ति आई और देश में कम्प्यूटर आया। राजीव गांधी ने शिक्षा को हर तरफ बढाबा दिया। माताधिकार 18 वर्ष किया गया और पंचायती राज को शुरू किया गया। राजीव गांधी ने पंजाब और कश्मीर में हो रही आतंरिक लडाई को भी काबू में करने की भरपूर कोशिशें की।

जिस समय राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे उस समय को उस युग का सबसे प्रगतिशील समय माना जाता है। उन्होने सूचना प्रोद्योगिकी क्रान्ति की नींव रखी जिसका हम फल प्राप्त कर रहे हैं। उन्होने पीसीओ को माध्यम से देश के ग्रामीण और दूर दराज के कानों में टेलीफोन के नेटवर्क को फैलाया। उन्होने स्कूलों, कॉलेजों और कई संस्थानों की स्थापना की और उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित किया।

राजीव गांधी के शासनकाल में भारतीय सेना द्वारा बोफोर्स तोप की खरीदारी की गई। जिसमें भ्रष्टाचार का मुद्दा सामने आया। बोफोर्स डील में एक मुख्य पात्र इटली का एक नागरिक था जिसका नाम ओटावियो क्वाटोराची था जो​ कि सोनिया गांधी का मित्र था। बोफोर्स घोटाले की वजह से अगले चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पडे।

राजीव गांधी की मृत्यु

21 मई 2018 को श्रीपेरंबदुर में एक सार्वजनिक सभा में एक आत्मघाती हमलें में उनकी मृत्यु हो गई। सभा के दौरान एक लडकी माला लेकर राजीव गांधी के पास आई उसने माला राजीव गांधी के गले में डाली और पैर छूने के लिये झुकी। तभी बम धमाका हुआ और 25 लोगों की जानें गईं जिसमें राजीव गांधी भी शामिल थे। उस लडकी के शरीर आरडीएक्स बंधा हुआ था। तीन दिन बाद, 24 मई, 1991 को, उन्हें एक राज्य की ओर से अंतिम संस्कार दिया गया और बाद में यमुना नदी के तट पर हिंदू अनुष्ठान के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राजीव गांधी देश के पहले युवा प्रधानमंत्री थे। उन्होने कम समय की राजनीतिक जीवन में खास जगह बनाईं। उनके कामों को आज भी याद किया जाता है। मरणोपरान्त राजीव गांधी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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