प्राचीन समय की बात है भारत में एक ब्रह्मदत्त नाम का राजा राज्य करता था। वह एक बेहद न्यायशील एवं लोकप्रिय राजा था। सम्पूर्ण राज्य में राजा की बहुत प्रशंसा होती थी। राज्य ही नही अपितु राज्य से बाहर भी उसकी प्रशंसा होती थी। लेकिन राजा को एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो उसके दोष ढूंढ सके। लेकिन उसे ऐसा कोई भी व्यक्ति नही मिल रहा था। जो उसे उसके दोष बता सके। इस​लिये वो पूरे राज्य में वेश बदलकर कर घूमने लगा लेकिन राजा जहॉ भी जाता उसे उसका गुणगान ही सुनने को मिलता था।

राजा घूमते घूमते हिमाचल प्रदेश पहुॅचा वहॉ वह घने जंगलों और दुगर्म पवर्तों से होते हुये एक बोधिसत्व आश्रम में पहुंचा। बोधिसत्व ने राजा का सत्कार किया उससे कुशल क्षेम पूंछा। राजा आश्रम में एक ओर चुपचाप बैठ गया। बोधिसत्व ने जंगल से पके गोदे के फल लाकर दिये राजा ने जब फल खाये तो वे उसे बहुत स्वादिष्ट और मीठे लगे। राजा ने बोधिसत्व से पूंछा कि ये फल इतने मीठे और स्वादिष्ट क्यों हैं। इस पर बोधिसत्व ने कहा कि जो राजा धर्मानुसार और न्यायपूर्वक राज करता है उसके राज्य में ही ये फल इतने मीठे होते हैं। वहीं जो राजा अधार्मिक एवं अन्यायी होता है उसके राज्य में मधु, शक्कर, जंगल के फल—फूल सभी कडवे और स्वादहीन हो जाते हैं बल्कि ये ही नहीं सारा राज्य दूषित हो जाता है।

राजा ये जानकर बोधिसत्व को बिना अपना परिचय दिये ही राज्य लौट गये। वापस आकर उन्होने सोचा कि बोधिसत्व के कथन की परीक्षा करूंगा। राजा ने राज्य में अन्याय एवं अधर्म से राज्य करना शुरू कर दिया। कुछ समय के पश्चात वह फिर बोधिसत्व के आश्रम में पहुॅचा और उन्हे प्रणाम करके एक जगह बैठ गया। बोधिसत्व ने फिर से उसे गोदे खाने को दिया। इस वे गोदे राजा को बहुत कडवे लगे। राजा ने गोदे थूक दिये और ​बोधिसत्व से कहा कि ये फल तो मीठे हुया करते थे आज ये फल इतने कड़वे क्यों हैं। इस पर बोधिसत्व ने कहा कि जरूर राजा अन्यायी और क्रूर होगा। राजा के अन्यायी होने पर सभी फल—फूल, वस्तुऐं नीरस और कड़वी हो जाती हैं। यही नही सारा राज्य ओजरहित हो जाता है।

राजा की जिज्ञासा शान्त हो चुकी थी। राजा ने बोधिसत्व से कहा कि मैं ही राजा हूॅ और मैने ही इन फलों को पहले मीठा और फिर कड़वा कर दिया और और में उन्हे फिर से मीठा करूंगा और कभी कड़वा नही होने दूंगा। राजा इतना कहकर अपने राज्य वापस आ गया और धर्म व न्यायपूर्वक राज्य करने लगा। उसका राज्य फिर से सम्पन्न होगा।

(भारत में 563 ईसा पूर्व महात्मा बुध्द का जन्म हुआ था कई जातक कथाओं में महात्मा बुध्द को पूर्व जन्म को ही बोधिसत्व नाम से उल्लेख किया गया है। ये कहानी प्रचलित जातक कथाओं से ली गई है।)