आसमान में बादल छाए थे, घना अँधेरा, ठण्ड भी बढती जा रही थी। हजारी लाल गुप्ता के घर में खुशखबरी आने वाली थी पड़ोस की महिलाये भी आ चुकी थी। घर के बड़े बुजुर्गो के साथ हजारी लाल गुप्ता भी द्वार पे आश लगाये बैठे थे। रात होती गयी अँधेरा बढ़ता गया और अंत में दर्द का इम्तिहान पार करते हुए हजारी लाल की पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया। घर में खुशी का माहौल तो था लेकिन गाँव में उस वक्त बिजली नहीं थी इसलिए उस माहौल को अँधेरे में ही बनाये रखा गया मिट्टी के तेल से ढेबरी{एक तरह का लैंप} जल रहा था जो सिर्फ एक ही था। जो इतनी कठिनाइयों के बीच आया था उनका नामकरण हुआ तो नाम पड़ा गब्बू गुप्ता. गब्बू गुप्ता तो अब तक अपनी जिंदगी के सोलह बसंत देख चुके हैं काफी समझदार भी हो चुके है खैर कहानी में आगे न जाते हुए आप लोगो को फ्लैशबैक में लेके चलता हूँ…..

गब्बू गुप्ता बड़े हो रहे थे और अपने पैरो पे खड़े भी, चार साल की उम्र में गब्बू गुप्ता का प्राइमरी पाठशाला कुशभौना में प्रवेश कराया गया। गब्बू बहुत मेहनती छात्र हैं और सिर्फ अपनी पढाई पे ध्यान दे रहे हैं इसी बीच कुछ ऐसा होता है की गब्बू काफी दुखी और हताश हो जाते हैं क्युकी उनकी माँ उन्हें इस दुनिया में छोड़ के भगवान की अनोखी दुनिया में चली जाती हैं जहाँ से आने की कोई उम्मीद नहीं होती. गब्बू को उनके पिता हजारी लाल गुप्ता और बड़ा भाई सुरेश गुप्ता मिलकर पालते हैं। गब्बू धीरे धीरे बड़े हो रहे हैं अब तीसरी कक्षा में प्रवेश ले लिए हैं इसी बीच गब्बू की जिंदगी में एक मोड़ आता है और गब्बू की जिंदगी काफी खुशनुमा हो जाती है। यहाँ से उनकी नयी सहपाठी काजल का प्रवेश होता है। गब्बू को काजल पहली ही नजर में पसंद आ जाती हैं और गब्बू काजल से प्यार कर बैठते हैं। ये प्यार कुछ दिन तक एक तरफ़ा ही रहता है। लेकिन धीरे धीरे दोनों में नजदीकियां बढती हैं और काजल को भी गब्बू से प्यार हो जाता है। अब गब्बू का मन पढाई से हटने लगता है और काजल के कान तक के लगे काजल पे जाके अटक जाता है। जिंदगी चलती रहती है। गब्बू भरतु के खेत तक काजल के साथ जाते है फिर वापस बोरे में भूसा भरके घर आ जाते हैं। कल महाशिवरात्रि का मेला है गब्बू भी अपने दोस्तों के साथ मेला जाने की ठान चुके हैं। सुबह हुई गब्बू तैयार हैं, अंगद और छोटू बाबा को भी साथ लेके जायेंगे। जल चढाने के लिए लोटा और घर से चावल भी लिया है बेल के पत्ते वही ले लेंगे। खैर तीनो मेला पहुच जाते हैं धक्का खा के मंदिर में भगवान शिव को जल भी चढ़ा देते हैं और मन्नतो में काजल को मांग रहे होते हैं तभी धक्का लगता है और गब्बू मंदिर के बाहर मिलते हैं खैर मन ही मन सोचते हैं मन्नत तो मांग ही लिए हैं। पश्चात मेला घुमने निकल जाते हैं। मेला घूमते घूमते अचानक उनकी नजर गोदना {टैटू} बनाने वाली दूकान पे पड़ती है और अंगद और छोटू बाबा को छोड़ के दूकान पे पहुच जाते हैं और वहां पे काजल के नाम का गोदना {टैटू} अपने हाथ पर बनवाते हैं और लाल रंग के भूसट {शर्ट} की बाह बंद करके दोबारा अपने दोस्तों की खोज में लग जाते है चलते चलते गब्बू अपने काजल के लिए सीसे वाला ताजमहल खरीदते हैं और साइकिल स्टैंड पे तीनो दोस्त मिल जाते हैं और घर की तरफ प्रस्थान कर देते हैं सुबह होती हैं, गब्बू नहा धो के सरसों का तेल लगा के सीसे का ताज महल बगल दबा के स्कूल चल देते है। काजल के इन्तजार में गब्बू स्कूल का टाट {दरी} बिछा रहे होते हैं काजल भी थोड़ी देर में आ जाती हैं और गब्बू काजल को मास्टर साहब के चोरी छिपे सीसे का ताजमहल दे देते हैं। खाने की आधी छुट्टी में गोदना {टैटू} काजल को दिखाते हैं काजल गब्बू के हाथो को पकड़ के कहती हैं अब अइसा कुछु नाइ करेओ नाइ तऊ हम मरी जाबै. छुट्टी होती है रोज की तरह गब्बू भरतु के खेत तक काजल को छोड़ के आते हैं और बोरे में भूसा भरके घर आ जाते हैं।

दिल ऊब चूका है गब्बू का पढाई से, अब अपनी जिंदगी में कुछ किक चाहते हैं। जिसकी तलाश में गब्बू घर छोड़ के काजल को जुबान देके परदेश भाग जाते हैं। कुछ दिन परदेश में रहते हैं पैसे कमाते हैं और ज्यादा समझदार हो जाते हैं फिर वापस अपने गाँव आते हैं लेकिन अब गब्बू अपनी जिंदगी में किक नहीं चाहते घर आके काजल से मिलने जाते हैं लेकिन काजल अपने बप्पा के डर से नहीं मिलती और गब्बू से कहती कि अब हम तुहसे कभो ना मिलब गब्बू का दिल टूट जाता है ।वापस अपने घर आ जाते हैं। अब तक गब्बू के भाई सुरेश ने गाँव में अपनी किराने की दूकान खोल ली है। जो गब्बू को समझाता है कि पढ़ो लिखो जिंदगी बर्बाद मत करो शायद ये सब बाते गब्बू की समझ में भी आ जाती है। गब्बू जिंदगी की नई शुरुवात कर चुके हैं गब्बू की शादी भी हो गयी है। पास के स्कूल में पढने जाते हैं शाम को भाई की दूकान सँभालते हैं, हीरो स्पलेंडर प्रो सेल्फ वाली चला लेते हैं। जिंदगी अच्छी कट रही हैं छोटू बाबा को भी दूकान में नौकरी दिला दिए हैं। अंगद परदेश में कमाते हैं आज भी सारे दोस्त मिलके रहते हैं। कभी कभी काजल भी अपने बप्पा के साथ दूकान पे सामान लेने आती है तो गब्बू फूले नहीं समाते। लेकिन आज भी सोच में रहते हैं की…….
बना हाथ में गोदना {टैटू} मिटाऊँ कैसे

ये कहानी हमें हर्षित शुक्ला जी ने भेजी है। हर्षित एक पत्रकार हैं। अगर आपके पास भी कोई लव स्टोरी है तो आप हमें 9058393330 पर WhatsApp कर सकते हैं।