मानव शरीर के अंग और उनके कार्य

Organizations and Their Functions

मानव शरीर एक मशीन की तरह होता है और अंग मशीन के पुर्जों का काम करते हैं। मानव शरीर के बाह्य अंगों के अपने काम होते हैं जैसे पैरों का चलना, दौडना आदि। उसी प्रकार शरीर में कुछ विशेष अंग होते हैं जिनसे हम अपने आसपास का अनुभव करते हैं जैसे आंख, कान, नाक, त्वचा तथा जीव आदि। इन अंगों को ज्ञानेंन्द्रिया कहते हैं।

मानव शरीर के आन्तरिक अंग

हमारे शरीर के अंदर कई अंग होते हैं। जिन्हे हम बाहर से नही देख सकते हैं जैसे ह्दय, मस्तिष्क, फेफडे, अमाशय, आंत, यकृत, गुर्दे आदि। इन अंगों का आन्तरिक अंग कहा जाता है। इन अंगों के काम निर्धारित होते हैं। त्वचा तथा अस्थियों के द्वारा इन्हे सुरक्षा दी जाती है।

शरीर के महत्वपूर्ण आन्तरिक अंग

शरीर के ढांचे को बनाने व शरीर की गति मे सहायक अंग

अ.पेशियां – अपने हाथ को कोहनी से अंदर की तरफ मोडेंगे और हाथ की मुटठी को कंधे से स्पर्श करायेंगे तो आपको उभरा हुआ भाग ​का एहसास होगा। ये उभरा हुआ भाग मांसपेशियां होता है। इसी तरह मांसपेशियां हमारे शरीर में अन्य जगह भी होती हैं। मांसपेशियां शरीर के अंगों के हिलने—डुलने में सहायता प्रदान करती हैं।

ब.हड्डिया – बच्चे के शरीर में 300 व वय​स्क के शरीर में 206 हड्डिया होती हैं। हड्डियां कठोर होते हैं। हड्डियों से हमारे शरीर का ढांचा बनता हैं और आन्तरिक अंगों की सुरक्षा होती है। हड्डियां मांसपेशियों के एक साथ काम करने के कारण हम हिलते डुलते, चलते फिरते और अन्य प्रकार के काम करते हैं।

सांस लेने में सहायक अंग

श्वसन क्रिया मानव शरीर के जिंदा रहने के लिये पहली जरूरत है। श्वसन प्रक्रिया में नाक से सांस ली जाती है जो श्वास नली के माध्यम से हमारे फेफडों में जाती है। फेफडे वायु से आक्सीजन को सोख लेते हैं और कार्बनडाइआक्साइड नाम की गैस को बाहर निकाल देते हैं।

रक्त संचार में सहायक अंग

मानव शरीर में छाती की बाईं तरफ ह्दय होता है। ह्दय शरीर में रक्त संचार का कार्य करता है। ह्दय एक पम्प की तरह काम करता है। जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह बना रहता है।

भोजन पचाने में सहायक अंग

वयस्क मानव के मुंह में 32 दांत होते हैं। जो भोजन को काटने, फाडने और चबाने का काम करते हैं। दांतो के प्रयोग से भोजन के छोटे—छोटे टुकडे हो जाते हैं जिससे शरीर में आसानी से भोजन चला जाता है और पच भी जाता है। भोजन ग्रहणी से होते हुये एक थैली जैसे अंग में पहुंचता है इस अंग को अमाशय कहते हैं। अमाशय में भोजन तीन से पांच घण्टे तक रहता है। यहां पर भोजन में पाचक रस मिल जाते हैं। जिससे भोजन आसानी से पच जाता है। पित्ताशय और अग्नाशय आदि से भी भोजन को पाचक रस मिलते हैं।

अमाशय से भोजन छोटी आंत में चला जाता है। छोटी आंत की दीवारों में लगातार एक तरह की गति होती है जिससे भोजना पिसता हुआ आगे बढता है। पचे हुये भोजन का पोषक अंश छोटी आंत सोख लेती हैं बाकी अवशेष पदार्थ बडी आंत में चलता जाता है जिसमें से बडी आंत पानी को अवशोषित कर लेती है और शेष बचा हुआ भोजन मल के रूप में शरीर से बाहर निकाल देती है। इस पूरी क्रिया को पाचन क्रिया कहते हैं।

दूषित पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में सहायक अंग

मानव शरीर में होने वाली क्रियाओं में कुछ दूषित पदार्थ भी बन जाते हैं। गुर्दे इन दूषित पदाथों को रक्त में छान कर अलग करते हैं और दूषित पदार्थों को मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकाल देते हैं।

सोचने, विचारने तथा शरीर पर नियन्त्रण रखने में सहायक अंग

म​स्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। ये शरीर के सभी अंगो को नियंत्रित करता है और उन्हे निर्देशित करता है। मस्तिष्क ही सोचने, समझने का काम करता है। मानव शरीर में जरा सी भी हलचल के लिये मस्तिष्क से निर्देश मिलना जरूरी होता है।

क्या आप जानते हैं:—

1. बच्चों के शरीर में 300 हड्डियां होती हैं तथा वयस्कों में ये घटकर 206 रह जाती हैं।
2. पचा हुआ भोजन रक्त के साथ सारे शरीर में पहुंचता है।
3. एक वयस्क मनुष्य की छोटी आंत लगभग 6 से 7 मीटर तक लम्बी होती है।